क्या इन पत्रकारों को नहीं पता कि आप कोरोना वायरस की महामारी के समय पर रिपोर्टिंग कर रही हो अच्छी तरह से देखो हमें लग रहा है शायद नहीं पता हैबड़े दुख के साथ यह खबर बनानी पड़ रही है एक तरफ हमारे प्रधानमंत्री हैं जो जनता से हाथ जोड़कर मकानों में भी अकेले-अकेले दूरी बनाकर रहने को कह रहे हैं और उसे खुद भी फॉलो कर रहे है आज की प्रधानमंत्री की कैबिनेट मीटिंग देखो कित कितने फासले पर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के सदस्य बैठे हुए हैं पूरे अनुशासन के साथ दूसरी तरफ हमारे कुछ पत्रकार साथी है और समझदार भी है परंतु दुख यह है कि मेरे टोकने पर उन्हें ऐसा लगा जैसे मैंने उनके अहंकार को क्रोध दिया हूं जब के आज की स्थिति ऐसी है कि अहंकार का कोई मतलब ही नहीं होना चाहिए ना हमारे अंदर ना किसी और के अंदर हमारे प्रधानमंत्री ही जब जनता से प्रार्थना कर रहे थे हाथ जोड़कर आंखें उनके नम थी क्या हम पत्रकार लोग उनकी आंखों का सम्मान कर पा रहे हैं हमारे पत्रकार साथी एक मोटरसाइकिल पर 2 पत्रकार आपस में चिपक कर बैठे हैं वह दूसरों को क्या शिक्षा देंगे और उनके कहे को कोई मानेगा भी तो जब वे खुद ही उस चीज का अनुसरण नहीं कर रहे हैं और मेरे कहने पर मुझे यह कहते हैं फिर निकलो निकलो निकलो हमें कानून मत सिखाओ बड़ा दुख हुआ आज अपनी पत्रकारों की युवा पीढ़ी को देखकर चलो में एक खबर लगा रहा हूं दोनों के फोटो के साथ प्रधानमंत्री का भी फोटो डालता हूं और इन पत्रकारों का भी अब जनता को तय करना है प्रशासन को तय करना है यह गलत है या नहीं जब सरकार या हमारे इलेक्ट्रॉनिक चैनल पैसों के रुपए के लेनदेन को भी सुरक्षित नहीं मांग रहे हैं तो फिर यह पत्रकार एक मोटरसाइकिल पर दो चलकर क्या शिक्षा देना चाह रहे हैं अगर अकेले नहीं चल सकते तो घर बैठ जाएं नहीं तो हिम्मत करें और अकेले चले आज पत्रकार को साहस हिम्मत के साथ संयम की भी जरूरत है और दूसरे को समझाने की क्षमता होनी चाहिए
क्या इन पत्रकारों को नहीं पता कि आप कोरोना वायरस की महामारी के समय पर रिपोर्टिंग कर रही हो